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बड़ी खबर: पहाड़ी मंदिर घोटाला आरोपी को कांग्रेस में मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी ?

​घमासान: झारखंड कांग्रेस में ‘लेटर वार’, आर-पार के मूड में दिग्गज नेता।
​दिल्ली में डेरा: प्रभारी जी.ए. मिराजुद्दीन (के. राजू) से मिलेंगे राधाकृष्ण किशोर, बंधु तिर्की भी रेस में।


रांची// झारखंड कांग्रेस के अंदरूनी गलियारों से इस वक्त एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। एक तरफ जहां पार्टी के भीतर गुटबाजी और ‘लेटर वार’ चरम पर है, वहीं दूसरी तरफ लगातार विवादों में रहने वाले प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता राकेश सिन्हा को लेकर सियासी बाजार गर्म है। चर्चा है कि वित्तीय घोटाले के आरोपों से घिरे राकेश सिन्हा पर कार्रवाई करने के बजाय, प्रदेश कांग्रेस उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी में है।



मामला रांची के प्रसिद्ध पहाड़ी मंदिर से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि झारखंड राज्य हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड के तहत राकेश सिन्हा ने पहाड़ी मंदिर के कोष में लगभग 3 लाख 10 हजार रुपये का वित्तीय घोटाला किया है। सिलसिलेवार तरीके से देखें तो पचास हजार, सत्तर हजार करके कुल पांच किस्तों में इस राशि की हेराफेरी का आरोप है। हालांकि, राकेश सिन्हा की ओर से अब तक इन आरोपों को लेकर कोई ठोस सफाई या सबूत पेश नहीं किया गया है और मामला फिलहाल हाई कोर्ट में विचाराधीन है।
​लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि कड़ी कार्रवाई करने के बजाय, झारखंड प्रदेश कांग्रेस इस मामले में बेहद नरम रवैया अपना रही है। सूत्रों की मानें तो पार्टी उन्हें राज्य संगठन में किसी बड़े पद से नवाजने की तैयारी कर रही है।



इधर, राकेश सिन्हा को बड़ी जिम्मेदारी देने की सुगबुगाहट के बीच झारखंड कांग्रेस के भीतर का असंतोष भी फूट पड़ा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री राधाकृष्ण किशोर प्रदेश नेतृत्व के रवैये से बेहद नाराज नजर आ रहे हैं। ‘लेटर वार’ के बाद अब वे आर-पार के मूड में हैं। खबरें हैं कि आगामी 18 मई को वे दिल्ली में झारखंड कांग्रेस के प्रभारी के. राजू से मुलाकात कर सूबे के ताजा हालातों और अपनी नाराजगी से उन्हें अवगत कराएंगे।
​वहीं दूसरी तरफ, कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष बंधु तिर्की पहले से ही दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। हालांकि, उनका दावा है कि दिल्ली दौरा केवल संगठन को मजबूत करने की रणनीतियों को लेकर है।



​अब देखना बेहद दिलचस्प होगा कि गुटबाजी और आरोपों से घिरी झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी आगामी दिनों में क्या फैसला लेती है? क्या दागी चेहरों को बड़ी जिम्मेदारी देकर पार्टी नया विवाद मोल लेगी, या फिर पुरानी कमेटी को भंग कर किसी नए और साफ-सुथरे नेतृत्व की तलाश की जाएगी? इस पूरे सियासी घटनाक्रम पर हमारी नजर बनी रहेगी।

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