
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने पद्म भूषण सम्मान से अलंकृत अपने पिता एवं राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री स्मृति शेष-स्व० शिबू सोरेन की प्रथम पुण्यतिथि पर रामगढ़ जिला के नेमरा स्थित सोना सोबरन +2 उच्च विद्यालय, लुकैयाटांड़ परिसर में उनकी आदमकद प्रतिमा का अनावरण कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी।

मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन, माता श्रीमती रूपी सोरेन सहित समस्त परिजनों ने दिशोम गुरु स्मृति शेष-स्व० शिबू सोरेन जी को दी विनम्र श्रद्धांजलि।

मुख्यमंत्री ने एक पुत्र के रूप में अपने पिता एवं राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री स्मृति शेष-स्व० शिबू सोरेन जी को नमन करते हुए राज्य निर्माण और सामाजिक न्याय के लिए उनके अतुलनीय योगदान को याद किया।

नेमरा (लुकैयाटांड़) की पावन धरा पर दिशोम गुरू शिबू सोरेन जी की प्रतिमा के अनावरण के साथ-साथ क्षेत्र को मिली 105.2 करोड़ रुपए की योजनाओं की सौगात।रामगढ़ जिला स्थित लुकैयाटांड़, नेमरा में आयोजित झारखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री व पद्म भूषण से सम्मानित दिशोम गुरु स्मृति शेष-स्व० शिबू सोरेन की प्रथम पुण्यतिथि पर उनकी प्रतिमा का अनावरण एवं विकास मेला-सह-पारितोषिक वितरण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की आजादी के पहले और आजादी के बाद भी जिस प्रकार का शोषण हमारे समाज ने झेला और उस शोषण के विरुद्ध जिस निडरता से हमारे पूर्वजों ने लड़ाई लड़ी—उस संघर्ष से सीख लेना हमारा कर्तव्य है।

समाज की असली ताकत एकजुटता में निहित, शहीदों के आदर्शों से प्रेरणा लेनी चाहिए* मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे दादा जी अमर शहीद स्व० सोबरन मांझी जी ने भी समाज के उत्थान में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था। उस समय रामगढ़ जिला, हजारीबाग जिले का ही एक हिस्सा हुआ करता था, जहाँ एक छोटे से विद्यालय में उन्होंने शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएँ दीं और बच्चों को शिक्षित करने का काम किया, लेकिन असामाजिक तत्वों ने रात के अँधेरे में बड़ी ही निर्ममता से उनकी हत्या कर दी।

वह घटना मेरे जन्म से पहले की है, लेकिन आज भी जब उस काले अध्याय को याद करते हैं, तो मन व्यथित हो उठता है।
उन्होंने कहा कि आज का दौर नई युवा पीढ़ी का दौर है। हमारी युवा पीढ़ी बड़ी ऊर्जा और ताकत के साथ आगे बढ़ रही है, लेकिन इस ताकत के साथ जहाँ अच्छाइयाँ और अपार संभावनाएँ हैं। हम सबकी ज़िम्मेदारी है कि हम अपनी नई पीढ़ी को सही मार्ग पर बनाए रखें, ताकि वे भटकाव के रास्ते से कोसो दूर रहें।
उन्होंने कहा कि आज आदरणीय “गुरुजी” के विचार और आदर्श केवल उनकी जन्मस्थली, पंचायत या गाँव तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे राज्यभर व देश में आज उन्हें बड़े आदर और श्रद्धा के साथ याद किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि बारिश का मौसम होने के बावजूद आज पूरे राज्यभर में आदरणीय गुरुजी की याद में लोग स्वतःस्फूर्त एकत्रित हो रहे हैं। राजनीतिक दलों से ऊपर उठकर हर जिले में समाज के लोग एकजुट हो रहे हैं। आदरणीय दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी ने अपने आंदोलन के माध्यम से न केवल झारखंड को एक विशिष्ट पहचान दी, बल्कि एक महान जननायक के रूप में अमूल्य योगदान दिया। वे राजनीति की पारंपरिक सीमाओं से बहुत आगे निकल चुके थे—एक ऐसा व्यक्तित्व जिसके समक्ष पद, नेता, विधायक और मंत्री सब फीके पड़ जाते हैं।
उन्होंने कहा कि गुरुजी जैसे वीर सपूतों ने अपने खून-पसीने से सींचकर हमें यह अलग राज्य बनाकर दिया है, लेकिन आज इस राज्य को सजाने और संवारने की एक भारी-भरकम ज़िम्मेदारी हम सबके कंधों पर है। एक ज़िम्मेदार सरकार होने के नाते हमारा यह निरंतर प्रयास है कि राज्य के अंतिम व्यक्ति तक सरकार की आवाज़ और सुविधाएँ पहुँचे और आपकी आवाज़ सीधी सरकार तक आए। हम सब मिलकर राज्य के उज्ज्वल भविष्य के लिए क्या बेहतर हो सकता है, इसका मार्ग प्रशस्त करें।
*महान आत्माओं की याद को अपने दिल में बसाने का दिन*
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि पूर्व में हम सब इस लुकैयाटांड़ में अमर शहीद सोबरन मांझी जी की याद में एकत्रित होते रहे हैं। अब आदरणीय गुरुजी के सम्मान में भी हम सब यहाँ निरंतर जुटेंगे। हमारा पैतृक गाँव नेमरा यहाँ से बिल्कुल समीप ही है, जहाँ आदरणीय गुरुजी का जन्म हुआ था। चूँकि इतने सारे लोगों को उस छोटे से गाँव में समायोजित करना कठिन था, इसीलिए आप सबों के लिए इस स्थल को चिह्नित किया गया, ताकि आने वाले समय में हम बड़ी-से-बड़ी संख्या में यहाँ एकत्रित होकर अपने महान नायकों को याद कर सकें और उनकी प्रेरणा को आगे बढ़ाने का संकल्प ले सकें।
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि आज का दिन औपचारिक भाषण देने का नहीं है। आज प्रथम पुण्यतिथि पर मूर्ति के अनावरण के साथ-साथ ऐसे महान आत्माओं की याद को अपने दिल और आत्मा के अंदर बसाने का दिन है। भले ही वे शारीरिक रूप से आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका दिखाया संघर्ष और मार्ग आज भी हम सबों के सामने स्पष्ट दिखाई देता है।
*झारखंड वीरों की पावन भूमि*
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि झारखंड की इस पावन धरा पर धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा, सिदो-कान्हू, निर्मल महतो, विनोद बिहारी महतो और आदरणीय गुरुजी जैसे अनगिनत महापुरुषों का जन्म हुआ। इन महापुरुषों के त्याग के कारण ही झारखंड एक राज्य के साथ-साथ वीरों की पावन भूमि के रूप में स्थापित है। इसके हर कोने में कोई न कोई वीर सपूत दिखाई और उनका प्रेरणादायक संदेश सुनाई देगा। हम सब उन महान वीर पुरुषों के वंशज और सपूत हैं। वीरों की इस धरती पर हम सभी वीर हैं, और यह वीरता की लड़ाई हमें आपस में नहीं, बल्कि अपने दुश्मनों से लड़नी है। उन्होंने कहा कि हमें अपने राज्य के इतिहास को कभी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। उन्होंने विपरीत परिस्थिति में दिशोम गुरू के प्रथम पुण्यतिथि पर यहां पधारने वाले सभी व्यक्तियों के प्रति आभार जताया औरधन्यवाद! तथा जोहार! कहा।
प्रथम पुण्यतिथि पर राज्य के मंत्री राधा कृष्ण किशोर, मंत्री संजय प्रसाद यादव, मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, मंत्री योगेंद्र प्रसाद, मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, सांसद राज्यसभा महुआ माजी, विधायक उमाकांत रजक, विधायक कुमार जयमंगल सिंह, विधायक अमित महतो, विधायक ममता देवी, पूर्व मंत्री बेबी देवी, मुख्य सचिव अविनाश कुमार सहित राज्य सरकार के वरीय अधिकारीगण, विशिष्ट अतिथिगण सहित बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे।