
सिल्ली :: मुरी सिल्ली और मुरी क्षेत्र में माताओं ने संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना को लेकर जितिया व्रत श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया। इस अवसर पर महिलाओं ने पूरे दिन निर्जला उपवास रखकर भगवान जीतवाहन की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। पर्व को लेकर क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बना रहा।

मान्यता है कि जितिया व्रत करने और भगवान जीतवाहन की पूजा-अर्चना करने से संतान की रक्षा और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। माताएं अपने बच्चों के सुखद भविष्य और परिवार की खुशहाली की कामना के साथ कठिन निर्जला व्रत रखती हैं।
जितिया पर्व तीन दिनों तक मनाया जाता है। सप्तमी तिथि को नहाय-खाय के साथ व्रत की शुरुआत होती है। इसके बाद अष्टमी तिथि को माताएं निर्जला उपवास रखकर भगवान जीतवाहन की पूजा करती हैं। नवमी तिथि को पूजा-अर्चना और सूर्यदेव को अर्घ्य देने के बाद व्रती महिलाएं विधि-विधान से व्रत का पारण करती हैं।
जितिया पर्व में चील और सियारिन की कथा का विशेष महत्व है। व्रत के दौरान महिलाएं श्रद्धापूर्वक कथा सुनती हैं और संतान की रक्षा व दीर्घायु की कामना करती हैं। पर्व को लेकर महिलाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। वहीं, जितिया पूजन सामग्री, फल-फूल और अन्य आवश्यक सामान की खरीदारी को लेकर बाजारों में भी चहल-पहल रही।
