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एडवांस पैसे के बाद भी पंप सूखे, तेल कंपनियों की मनमानी पर भड़के 5 जिलों के 200 से अधिक पेट्रोलियम डीलर

​रांची (झारखंड): पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन, साउथ छोटानागपुर की वार्षिक जनरल मीट (AGM) सोमवार को कटहल मोड़ स्थित लाल गुटवा बैंक्वेट हॉल में संपन्न हुई। इस बैठक में रांची, गुमला, खूंटी, सिमडेगा और लोहरदग्गा के 200 से अधिक डीलरों ने हिस्सा लिया और तेल कंपनियों की सप्लाई नाकामी व तानाशाही रवैये पर कड़ा आक्रोश जताया।


​”डीलर राष्ट्र सेवा कर रहा है, भिखारी नहीं” — राजहंस मिश्रा


​एसोसिएशन के अध्यक्ष राजहंस मिश्रा ने कंपनियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि डीलर एडवांस पैसा जमा कर रहे हैं, इसके बावजूद पंप ‘ड्राई’ पड़े हैं।


​”पहले हमारे पास हमेशा 3 दिन का स्टॉक एडवांस में रहता था, लेकिन अब 3 से 4 दिन बीत जाने के बाद भी तेल की सप्लाई नहीं होती। कंपनियां रोज मैसेज भेजकर दावा करती हैं कि स्टॉक की कोई कमी नहीं है, जबकि हकीकत यह है कि ग्रामीण और हाईवे के पंप हफ्ते भर से बंद पड़े हैं। उपभोक्ता लाइनों में खड़े हैं और बदनामी डीलरों की हो रही है। तेल कंपनियों का मॉनिटरिंग सिस्टम पूरी तरह फेल हो चुका है।”


​उन्होंने साफ लहजे में चेताया कि अगर कंपनियों ने पारदर्शी तरीके से काम नहीं किया, तो उग्र आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी। डीलरों को आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर एक्शन चाहिए।


​बैठक में गूंजे ये 4 मुख्य मुद्दे और समस्याएं
​बैठक के दौरान डीलरों ने अपनी गंभीर समस्याओं को टेबल पर रखा, जो मुख्य रूप से इस प्रकार हैं:
​सप्लाई सिस्टम ध्वस्त: एडवांस पेमेंट के बाद भी 3-4 दिनों तक सप्लाई ठप रहती है। ऑयल डिपो पर टैंकरों को 7-8 घंटे तक लाइन में खड़ा रहना पड़ता है। पूरा इंडेंट सिस्टम फेल हो चुका है।


​10 साल से पुराना कमीशन (आर्थिक शोषण): पिछले एक दशक में पेट्रोल-डीजल के दाम दोगुने हो चुके हैं, लेकिन डीलरों का कमीशन 10 साल पुराने स्तर पर ही अटका हुआ है। मौजूदा स्थिति में पंप चलाना घाटे का सौदा बन गया है।


​जीरो पारदर्शिता और कम्युनिकेशन गैप: तेल कंपनियों ने डीलरों से सीधा संवाद बंद कर दिया है। स्टॉक की असली स्थिति छुपाई जा रही है, जिससे डीलरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।


​नियमों की जिद से रोज झगड़े: प्लास्टिक गैलन या बोतल में तेल देने पर पूरी तरह बैन है। अस्पताल, स्कूल, होटल के जनरेटर और किसानों के लिए सिर्फ ‘पेसो अप्रूव्ड जेरिकेन’ (PESO Jerrichan) की जिद की जा रही है। व्यावहारिक मार्गदर्शन न होने के कारण पंपों पर उपभोक्ताओं के साथ रोज झगड़े हो रहे हैं।


​5-सूत्री मांग पत्र सौंपने का निर्णय
​इस महाबैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि डीलरों की समस्याओं को लेकर तेल कंपनियों को एक 5-सूत्री मांग पत्र सौंपा जाएगा। मंच का सफल संचालन मानस सिन्हा द्वारा किया गया।


​बैठक में मुख्य रूप से उपस्थित रहे:
नीरज भट्टाचार्य, पूनम तिग्गा, कमलेश सिंह, सुदीप तिग्गा, विनीत लाल, अपूर्व पोद्दार, कुणाल कच्छप, दीपक, अमित सोनी, सुबोध दुबे, विनोद रंजन, निपुण मृणाल, प्रशांत चौधरी, प्रमोद कुमार, राहुल जायसवाल सहित पांचों जिलों के भारी संख्या में पेट्रोलियम डीलर।


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