
रांची, 07 जुलाई, 2026: रांची विश्वविद्यालय के सीनेट सदस्य, रोहित कुमार दुबे ने आज महामहिम राज्यपाल सह कुलाधिपति को एक ज्ञापन सौंपकर विश्वविद्यालय में व्याप्त प्रशासनिक कुव्यवस्था, शैक्षणिक विसंगतियों और जेपीएससी 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
सीनेट सदस्य श्री दुबे ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठाते हुए निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:
पीजी कक्षाओं का विकेंद्रीकरण: विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा पीजी कक्षाओं को संबद्ध महाविद्यालयों से हटाकर विश्वविद्यालय परिसर में केंद्रित करने के निर्णय को तत्काल वापस लेने की मांग की गई है, क्योंकि यह निर्णय ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए अत्यधिक कष्टकारी है।
सीनेट की बैठक: पिछले चार वर्षों से सीनेट की बैठक आयोजित नहीं की गई है, जो विश्वविद्यालय अधिनियम का सीधा उल्लंघन है। अधिनियम के अनुरूप वर्ष में दो बार बैठक सुनिश्चित करने की व्यवस्था बनाने का आग्रह किया गया है।
पीएच.डी. प्रवेश परीक्षा-2026: शोध कार्यों को गति देने हेतु पिछले चार वर्षों से लंबित पीएच.डी. प्रवेश परीक्षा का नोटिफिकेशन अविलंब जारी करने तथा शोध की गुणवत्ता जांचने हेतु ‘टर्निटिन’ (Turnitin) जैसे सॉफ्टवेयर की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
’एक व्यक्ति, एक पद’ नीति: विश्वविद्यालय में प्रशासनिक पारदर्शिता के लिए ‘एक व्यक्ति, एक पद’ नीति को सख्ती से लागू करने पर बल दिया गया है, ताकि योग्य प्राध्यापकों को समान अवसर मिल सके।
जेपीएससी परीक्षा की सीबीआई जांच: जेपीएससी 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में पारदर्शिता के अभाव और मेरिट सूची की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए, परीक्षा परिणाम को तत्काल निरस्त करने तथा संपूर्ण चयन प्रक्रिया की सीबीआई या किसी स्वतंत्र उच्च स्तरीय एजेंसी से जांच कराने की पुरजोर मांग की गई है।
श्री दुबे ने कहा कि इन मुद्दों को लेकर वे निरंतर संघर्षरत रहेंगे ताकि राज्य के लाखों युवाओं के भविष्य, शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को बचाया जा सके।