
सिल्ली: सिल्ली प्रखंड कार्यालय परिसर में मंगलवार को सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों के बीच साइकिल वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान प्रखंड के सात विद्यालयों के कुल 253 छात्र-छात्राओं को साइकिलें वितरित की गईं। हालांकि वितरण व्यवस्था में भारी लापरवाही देखने को मिली।

आरोप है कि साइकिल आपूर्ति करने वाली एजेंसी ने अधिकांश साइकिलों को बिना सही तरीके से फिटिंग और जांच किए ही विद्यार्थियों को सौंप दिया। कई साइकिलों के हैंडल, ब्रेक, पैडल, सीट और अन्य पुर्जे ढीले पाए गए, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। विद्यार्थियों ने बताया कि इस स्थिति में साइकिल चलाकर घर ले जाना भी जोखिम भरा था।

मौके पर कई छात्र स्वयं रेंच लेकर साइकिल के पुर्जे कसते नजर आए, लेकिन वे पूरी तरह ठीक नहीं कर सके। एक विद्यालय के शिक्षक ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि प्रत्येक साइकिल को उपयोग योग्य बनाने के लिए बाहर किसी मिस्त्री से लगभग 250 रुपये खर्च कर मरम्मत करानी पड़ेगी। वहीं हालमाद विद्यालय की छात्राओं का कहना था कि कई बार यह खर्च 500 रुपये तक पहुंच जाता है।
सबसे चिंताजनक बात यह रही कि कई विद्यालयों के बच्चों को सुबह करीब नौ बजे ही प्रखंड कार्यालय बुला लिया गया था। एक विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि बच्चे पूरे दिन भूखे-प्यासे इंतजार करते रहे और शाम करीब चार बजे के बाद साइकिल वितरण शुरू हुआ। बच्चों और शिक्षकों का कहना है कि कई बार अनुरोध करने के बावजूद साइकिलों की सही फिटिंग नहीं कराई गई।
अतिथि हाथों साइकिल वितरण करना था इस इंतजार में विद्यार्थी और शिक्षक घंटों तक परेशान होते रहे।
स्थानीय लोगों एवं अभिभावकों ने मांग की है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा को देखते हुए प्रत्येक साइकिल की तकनीकी जांच और फिटिंग सुनिश्चित करने के बाद ही वितरण किया जाए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके।