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4 साल पहले निकले 75 हजार, न नाली बनी, न सरकारी राशि लौटी.


सिल्ली। प्रखंड के लोवादाग पंचायत के बड़कीटांड गांव में 15 वें वित्त आयोग की राशि से नाली निर्माण योजना करीब चार साल से अधर में है। आरोप है कि नाली निर्माण के नाम पर लगभग 75 हजार रुपए की राशि एसके ट्रेडर्स को भुगतान कर दी गई, जबकि न तो नाली बनी और न ही निर्माण सामग्री पहुंची।

क्रया कहते हैं ग्रामीण :

ग्रामीणों का आरोप है कि राशि का भुगतान एमबी (मेजरमेंट बुक) तैयार किए बिना किया गया। ग्रामीण बताते हैं कि बरसात में जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश का पानी घरों में घुस जाता है। पंचायत और अधिकारियों से कई बार शिकायत के बावजूद अब तक काम शुरू नहीं हुआ। ग्रामीणों ने योजना की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई और राशि की वसूली की मांग की है।

मुखिया बोले- चार साल से मिल रहा सिर्फ आश्वासन
लोवादाग पंचायत के मुखिया लाल सिंह मुंडा ने बताया कि नाली निर्माण के लिए एसके ट्रेडर्स को भुगतान किया गया था। पिछले करीब चार वर्षों से वेंडर को काम शुरू करने के लिए कहा जा रहा है, लेकिन हर बार किसी न किसी कारण से काम टलता रहा। उन्होंने कहा कि न तो निर्माण हुआ और न राशि वापस की गई।

वेंडर ने माना- खाते में आई थी राशि:
एसके ट्रेडर्स के संचालक अभय कुमार ने बताया कि पंचायत कार्य के लिए उनके खाते में अग्रिम राशि आई थी। कुछ कारणों से काम शुरू नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि पंचायत या विभाग का निर्देश मिलने पर वह राशि ब्याज सहित वापस करने को तैयार हैं।

जेई बोले- कई बार दिया गया निर्देश
15वें वित्त आयोग के कनीय अभियंता विनोद रजक ने बताया कि एसके ट्रेडर्स को भुगतान किया गया था। वेंडर को कई बार कार्य शुरू करने का निर्देश दिया गया, लेकिन इसके बावजूद निर्माण कार्य नहीं कराया गया।

बीडीओ ने कहा- जांच के बाद होगी कार्रवाई
प्रखंड विकास पदाधिकारी ने कहा कि यदि बिना एमबी तैयार किए भुगतान हुआ है और कार्य भी नहीं कराया गया है, तो मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में दोषी पाए जाने वाले लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

चार साल बाद भी जवाब तलाश रही योजना :
बिना एमबी के सरकारी राशि का भुगतान कैसे हुआ ? चार वर्षों तक काम नहीं होने के बावजूद राशि की वसूली क्यों नहीं हुई? वेंडर पर अब तक क्या कार्रवाई की गई? जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित वेंडर की जवाबदेही कब तय होगी?
बड़कीटांड की अधूरी नाली अब सिर्फ एक विकास योजना का मामला नहीं है। यह सरकारी राशि के उपयोग, योजना की निगरानी और वित्तीय जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर रही है। अब प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि मामले में जिम्मेदारी किसकी तय होती है और सरकारी राशि की वसूली कैसे होती है।

बिना एमबी भुगतान पर सवाल; वेंडर बोला- ब्याज सहित राशि लौटाने को तैयार, बीडीओ ने दिए जांच के आदेश

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